076 जिस ब्रैस्ट कैंसर के मरीज को टाटा इंस्टिट्यूट ने रिजेक्ट कर दिया, वो इस इलाज से ठीक हो गई

 जिस ब्रैस्ट कैंसर के मरीज को टाटा इंस्टिट्यूट ने रिजेक्ट कर दिया, वो इस इलाज से ठीक हो गई



नमस्कार दोस्तों, आपका हमारी वेबसाइट में एक बार फिर से बहुत बहुत स्वागत है. यहाँ आपको राजीव जी द्वारा बताये गये हर प्रकार के घरेलू नुस्खे एवं औषधियां प्राप्त होंगी, तो दोस्तों आज की हमारी चर्चा का विषय है ब्रैस्ट कैंसर यानी की स्तन का कैंसर. राजीव जी ने बताया कि कुछ समय पहले ही उनके पास बिहार की 45 साल की महिला इलाज़ करवाने आई. उस महिला के स्तनों में कैंसर था और वो भी ठीक निप्पल्स में. टाटा इंस्टिट्यूट से उसने दो साल से इलाज करवाया लेकिन वो कैंसर ठीक होने की बजाये और बढ़ता चला गया.

वह महिला इतनी गरीब थी लेकिन उसने फिर भी अपने खेत बेच दिए ताकि उसका इलाज़ सही से चलता रहे. लेकिन डॉक्टर्स भी उसको ठीक करने में हार मान चुके थे. तो उस वक्त राजीव जी बिहार गये हुए थे. वह महिला उनके पास गयी और बोली कि वह हर जगह से थक चुकी है, अब सिर्फ राजीव जी पर ही उन्हें भरोसा है. तो राजीव जी ने उस महिला को गाय का मूत्र, हल्दी आदि उपाए बताये.


15 दिन बाद वह महिला फिर से राजीव जी से मिलने आई और इस बार उसका कैंसर घट कर पचास प्रतिशत रह गया था. टाटा इंस्टिट्यूट जैसे फेमस इंस्टिट्यूट भी जब फेल हो गये, उस समय गेंदे का फूल, गाय मूत्र और हल्दी जैसे सस्ते घरेलू नुस्खे चमत्कार बन कर सामने आये. आपको एक जानकारी दे दू कि कैंसर के सेल से एक ही केमिकल लड़ सकता है, उसका नाम है करकुमेन. इसे मानव नहीं बना सका. इसको प्रकृति ने ही बनाया है और प्रकृति ने इसको सिर्फ 2 ही चीजों में दिया है, एक है हल्दी और दूसरा है देशी गाय का मूत्र. आगे देखिए ये दवाई कैसे बनाई जाती है.


इस तरह बनाए दवाई >>

आपको गेंदे का फूल, गोमूत्र और हल्दी लेने है. अब आपको गेंदे के फूल की छोटी-छोटी पंखुड़िया निकालनी है. फिर उसमे हल्दी डालकर, गाय मूत्र डालकर उसकी चटनी बनानी है. अब इस चटनी को घाव पर लगाना है. इसको एक बार लगा कर घाव पर रुई लगा कर पट्टी बांध ले ताकि घाव को हवा न लगे. शाम को दोबारा लगाने से पहले उसको अच्छे से धो लें. और ध्यान रखिये की घाव को डेटोल वगेरा से नही धोना बल्कि गोमूत्र से ही धोना है. यही प्रोसेस आप हर रोज़ सुबह शाम कीजिये रिजल्ट बहुत अच्छा आएगा. एक बात का ध्यान रखे कि मूत्र देशी गाय का ही लेना है, जर्सी गाय का नहीं, उसमे रिजल्ट नहीं आएंगे. देशी गाय की पहचान ये है कि उसकी पीठ उठी हुई होती है, जबकि जर्सी गाय की बिलकुल फ्लैट और सीधी होती है, सुवर की तरह. क्योकि उसको सुवर का जीन मिक्स करके बनाया गया है.



077  शरीर का कोई भी अंग जल जाने पर इस उपचार से जलन तुरंत बंद होगी और फफोले नहीं पड़ेगे  

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इस विडियो में देखिए इसको कैसे बनाना है और कैसे लगाना है >>

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