054 गले की सब समस्याओं का इलाज, दूध, पानी या शहद किसी के साथ भी ले सकते है

 गले की सब समस्याओं का इलाज, दूध, पानी या शहद किसी के साथ भी ले सकते है



हल्दी एक फायदेमंद औषधि है। हल्दी किसी भी उम्र के व्यक्ति को दी जा सकती है चाहे वह बच्चा हो, जवान हो, बूढ़ा हो चाहे वह गर्भवती महिला ही क्यों न हो। यह शरीर से खून की गंदगी को दूर करती है और रंग को साफ करती है। हल्दी वात, पित्त और कफ व अन्य रोगों को खत्म करती है। अगर खांसी हो तो हल्दी को गर्म दूध में डालकर पीते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को भी बढ़ाती है। हल्दी से कपड़ों को रंगा भी जाता है। हल्दी और चूने को आपस में मिलाकर कुंकुम बनाया जाता है। इससे मधुमेह का रोग भी ठीक हो जाता है। यहां तक कि पुराने जमाने के गुरू, आचार्य और वैद्य तो इसे `मेहहनी´ के नाम से विभूषित करते थे।

हल्दी के पौधे जमीन के ऊपर हरे-हरे दिखाई देते हैं। इसके पौधे 2 या 3 फुट ऊंचे होते हैं और पत्ते केले के पत्ते के समान होते हैं। हल्दी की गांठों को जमीन से खोदकर निकाला जाता है और फिर हल्दी को साफ करके मटके में रखकर ऊपर से उसका मुंह बंद करके और आग की धीमी आंच पर पकाया जाता है जिससे इसकी कच्ची गन्ध दूर की जाती है और फिर इसे सुखाकर बेचा जाता है। एक ऐसी भी हल्दी होती है जोकि सिर्फ जंगलों में पाई जाती है जिसे हम आंबा हल्दी भी कहते हैं इसका उपयोग हम मसालों में नहीं करते लेकिन यह खून की खराबी और खुजली को मिटाता है।

हमने बहुत बार सुना हुआ है कि हल्दी के कई फायदे हैं. लेकिन हमें सारे फायदे पता नहीं होते. भाई राजीव जी ने हल्दी के बहुत सारे फायदे बताये. उन्होंने कहा कि अगर गले का कोई भी त्रास (तकलीफ) हो जैसे खांसी, सर्दी ऐसी कई गले की बीमारियाँ में सबसे अच्छी औषधि हल्दी है. हल्दी लेने के दो तरीके है. आप हल्दी को गर्म पानी में डाल के ले सकते है या गर्म दूध में डाल के ले सकते है. आप हल्दी से साथ शहद मिलाके भी ले सकते हैं. ये दो तरीके से हल्दी ली जा सकती है. गले के सभी रोगों में हल्दी काम काम आती है.

आपके बच्चे की टॉन्सिल की तकलीफ में आप डॉक्टर के पास जायेंगे तो वो तुरंत कहेगा कि ऑपरेशन करो, ऐसा कभी मत करना. थोड़े दिन हल्दी दे देंगे तो हमेशा के लिए तकलीफ खत्म हो जाएगी. और अगर ज्यादा टॉन्सिल की तकलीफ है तो थोड़ी सी (आधा चमच) सुखी हल्दी पाउडर के रूप में उसको सीधे गले में डाल दीजिये, हल्दी गले के अंदर तक चमच्च से ले जाइये और छोड़ दीजिये. 5-7 मिनिट में हल्दी लार से साथ नीचे उतर जाएगी. अगर आपने हफ्ते में 2 बार भी ऐसा किया तो हमेशा के लिए बच्चो की टॉन्सिल की तकलीफ खत्म हो जाएगी.

नियमित रूप से आप हल्दी का दूध पीते रहे और बच्चो को भी हल्दी का दूध पिलाते रहे तो रक्त में कभी दोष या कोई विकार नही आता. रक्त में विकार न हो तो शरीर में कोई विकार नही आता और हल्दी एंटी बायोटिक है. कही चोट लग गयी है तो तुरंत  हल्दी लगा दीजिये, खून बंद हो जायेगा. और कुछ भी लगाने की ज़रूरत नहीं है.

अगर आपको ऐसे लगता है कि आपका रंग थोडा डार्क है, और आप थोडा गोरा होना चाहते है, रंग साफ करना चाहते है तो हल्दी से अच्छी वस्तु कोई दुनिया में नही है. जिनको रंग अच्छा करना है वो नियमित रूप से हल्दी खाइए. दूध में डाल के या फिर पानी में डाल के या फिर शहद में मिला के. आपका रंग साफ होता जायेगा. दुनिया में जो काम फेयर एंड लवली नही कर सकती वो हल्दी कर सकती है. आधा चम्मच नियमित रूप से लेना पड़ेगा और ज्यादा दिन तक लेना पड़ेगा.

भाई राजीव जी ने एक और जानकारी देते हुए बताया कि जिनको ऐसी तकलीफ है कि सूर्य के प्रकाश में थोडा भी निकले तो त्वचा में जलन होने लगती है, तो आप हल्दी लगा के बाहर निकलेंगे तो कभी भी त्वचा में जलन नही होगी. सन बर्न या सन स्ट्रोक कभी भी नहीं होगा. और जिनको जीवन में ब्रहचर्य का पालन करना है, अपने शरीर की शक्ति और वीर को सुरक्षित रखना है वो नियमित रूप से हल्दी खाए तो ब्रहचर्य को बहुत अच्छे से आप पालन कर सकते है.

कैंसर की बीमारी में भी हल्दी का उपयोग होता है. अमेरिका सरकार ने हल्दी के 35 पेटेंट कैन्सर की ट्रीटमेंट के लिए लिए है. आपके घर में जो हल्दी काम आती है वो सुखी हल्दी है और एक ताजा हल्दी आती है जिसे नीली हल्दी कहते है या ताजा हल्दी कहते है जो खेत में से निकलके सीधे आती है. उस हल्दी की चटनी का रस कैन्सर के इलाज में काम आता है. किसी भी मरीज को गले का कैंसर है, पेट का कैंसर है, आहार नली का कैंसर है, ऐसे किसी भी मरीज को हल्दी का रस और शहद मिलाके देंगे तो ये हल्दी कैंसर में बहुत तेज काम करती है.




055  श्याम तुलसी बुखार को तोड़ने में पेरासिटामोल से भी तेज असर दिखाती है- दोनों तुलसी के बारे में जानिए  

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एक तत्व जो कैंसर को ठीक करने की ताकत रखता है वो सिर्फ भारत की हल्दी में ही है और दुनिया की किसी देश की हल्दी में नही है. ताजा हल्दी मिले और घर में कोई कैंसर का मरीज हो तो उसका रस निकाल के उस मे शहद मिलाकर उसे नियमित रूप से पिलाते रहिये. और शहद न मिले तो हल्दी में काकवी (तरल गुड) मिला के दे सकते है.

इस विडियो में देखिए हल्दी को कैसे लेना है >>

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